कुछ पंक्तियाँ वीर सपूतों के नाम
सिमट गए हैं बलिदान उनके
जिन्होंने सबसे ज़्यादा देश को चाहा
मेरी नज़र में हर उस शख्स को नवाज़ा जाए
जिसने हर क्षण देशभक्ति को सराहा
उन सैनिकों के परिवार का एक बसेरा
उन बलिदानियों की ज़मीरें थीं
उनके हिस्से में शहीद होना ही आया
यह बताने वाली उनके हाथों की लकीरें थीं
उसकी कुर्बानी की दाद देने पूरा देश खड़ा हो गया सवालों की तरह
वतन के झंडे पर अपनी याद छोड़ चला गया वो चंद ख्यालों की तरह
उसने तो न किसी का मज़हब पूछा और न ही धर्म पूछा
अपने फ़र्ज़ पर कुर्बान हो गया वो जीती जागती मिसालों की तरह
~ सिल्वेस्टर

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