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Showing posts from June, 2022

महसूस होता है

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  पीढ़ियों को जन्म देने का वरदान है वो इस बात का गर्व उसको महसूस होता है जब उसके घर के किसी सदस्य को हानि पहुँचे उनके घावों से ज़्यादा उसका दिल रोता है जब खाने के टेबल पर उसके अलावा सब करते हैं गपशप तब उसको भी अकेलापन महसूस होता है एक बार उसे बोलकर तो देखो कि आज पहले तुम खाना खा लो देखना उसका चेहरा कैसे खिल उठता है अपनी छोटी छोटी खुशियों का गला घोंटकर जीती है वो अपना जीवन फरमाइशें पूरी न होने की कमी उसे भी ज़रूर खलती होगी  हमें भरपेट खिलाकर खुद आधे पेट पर सोती है वो रात को भूख उसे भी लगती होगी सामंजस्य, प्रेम और दीवानगी का प्रतीक है वो रब ने हम सभी के घर अपना एक अवतार भेजा है हर मुश्किल या दुःख की घड़ी में भर जाता है उसका दामन माँ का प्यार उस वक़्त हमें महसूस होता है ~ सिल्वेस्टर 

ओझल होती इंसानियत

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  कुकर्मों की बौछार करके इंसानों ने देश की पवित्रता को नापाक कर दिया कैसे बुरे से बुरा सुलूक कर लेते हैं ये बेज़ुबानों पर? तुम लोगों ने तो इंसानियत को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया मनुष्य के अंदर पनपता वो शैतान देखो वक़्त के साथ बदलता वो हैवान देखो  किस कदर कर देता है इंसानियत को शर्मसार उसकी अच्छाइयों का दूर-दूर तक नामोनिशान देखो ~ सिल्वेस्टर 

कुछ पंक्तियाँ वीर सपूतों के नाम

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सिमट गए हैं बलिदान उनके जिन्होंने सबसे ज़्यादा देश को चाहा मेरी नज़र में हर उस शख्स को नवाज़ा जाए जिसने हर क्षण देशभक्ति को सराहा  उन सैनिकों के परिवार का एक बसेरा उन बलिदानियों की ज़मीरें थीं उनके हिस्से में शहीद होना ही आया यह बताने वाली उनके हाथों की लकीरें थीं  उसकी कुर्बानी की दाद देने पूरा देश खड़ा हो गया सवालों की तरह वतन के झंडे पर अपनी याद छोड़ चला गया वो चंद ख्यालों की तरह  उसने तो न किसी का मज़हब पूछा और न ही धर्म पूछा अपने फ़र्ज़ पर कुर्बान हो गया वो जीती जागती मिसालों की तरह ~ सिल्वेस्टर 

शायरी - कुछ लव्ज़ अपने, कुछ दर्द आपके

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शब भर थी आँखें नम हमारी पर      उन्होंने बड़े चैन से अंगड़ाइयाँ ली थी      गैरों का हाथ थामकर हमने      अपनों की भी बुराइयाँ की थी  किस पर क्या बीत रही होती है     यह सोचता कोई नहीं है     खून के आँसू तो अपने भी रुलाते हैं     पर पोंछता कोई नहीं है हयात के कुछ ही दिन तो बाकी हैं     ज़िन्दगी थोड़े चैन से जी लूँ?     न जाने फिर कब क़यामत आ जाए     इसलिए उम्मीद का एक घूँट पी लूँ? ~ सिल्वेस्टर