ओझल होती इंसानियत
कुकर्मों की बौछार करके इंसानों ने
देश की पवित्रता को नापाक कर दिया
कैसे बुरे से बुरा सुलूक कर लेते हैं ये बेज़ुबानों पर?
तुम लोगों ने तो इंसानियत को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया
मनुष्य के अंदर पनपता वो शैतान देखो
वक़्त के साथ बदलता वो हैवान देखो
किस कदर कर देता है इंसानियत को शर्मसार
उसकी अच्छाइयों का दूर-दूर तक नामोनिशान देखो
~ सिल्वेस्टर

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