महसूस होता है

 


पीढ़ियों को जन्म देने का वरदान है वो
इस बात का गर्व उसको महसूस होता है
जब उसके घर के किसी सदस्य को हानि पहुँचे
उनके घावों से ज़्यादा उसका दिल रोता है

जब खाने के टेबल पर उसके अलावा सब करते हैं गपशप
तब उसको भी अकेलापन महसूस होता है
एक बार उसे बोलकर तो देखो कि आज पहले तुम खाना खा लो
देखना उसका चेहरा कैसे खिल उठता है

अपनी छोटी छोटी खुशियों का गला घोंटकर जीती है वो अपना जीवन
फरमाइशें पूरी न होने की कमी उसे भी ज़रूर खलती होगी 
हमें भरपेट खिलाकर खुद आधे पेट पर सोती है वो
रात को भूख उसे भी लगती होगी

सामंजस्य, प्रेम और दीवानगी का प्रतीक है वो
रब ने हम सभी के घर अपना एक अवतार भेजा है
हर मुश्किल या दुःख की घड़ी में भर जाता है उसका दामन
माँ का प्यार उस वक़्त हमें महसूस होता है


~ सिल्वेस्टर 

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